गुरु का विश्वास ही शिष्य के जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार होता है।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अपने आदर्श, श्रद्धेय बाबूजी कल्याण सिंह जी को सादर नमन।
मेरे लिए बाबूजी केवल एक जननेता नहीं थे, वे मेरे राजनीतिक गुरु, मार्गदर्शक और जीवन के प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने मुझे केवल संगठन में कार्य करने का अवसर नहीं दिया, बल्कि जनसेवा, सादगी, राष्ट्रनिष्ठा और कार्यकर्ता के सम्मान का वह संस्कार दिया, जो आज भी मेरे सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
यह भाजपा का सदस्यता प्रपत्र मेरे लिए केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि बाबूजी के उस अटूट विश्वास की अमूल्य धरोहर है। जब उन्होंने अपने संपर्क के स्थान पर मेरा मोबाइल नंबर दर्ज कराया, तब उन्होंने केवल एक नंबर नहीं लिखा था, बल्कि मेरे कंधों पर विश्वास की ऐसी जिम्मेदारी रखी, जिसे निभाना मेरे जीवन का सबसे बड़ा संकल्प है।
समय के साथ परिस्थितियां बदल जाती हैं, लेकिन गुरु का विश्वास कभी पुराना नहीं होता। आज भी जब समाज, संगठन या राष्ट्रहित से जुड़ा कोई दायित्व निभाने का अवसर आता है, तो सबसे पहले बाबूजी का वह विश्वास स्मरण हो उठता है। वही विश्वास मुझे याद दिलाता है कि राजनीति केवल पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का विश्वास जीतने और उसे जीवनभर निभाने का व्रत है।
बाबूजी ने सिखाया था कि जनसेवा का सबसे बड़ा आधार जनता का विश्वास होता है। उसी विश्वास को बनाए रखना, हर कार्यकर्ता का सम्मान करना और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाना ही उनके आदर्शों के प्रति मेरी सच्ची श्रद्धांजलि है।
आज बाबूजी हमारे बीच भले ही सशरीर नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनके संस्कार और उनका मुझ पर किया गया विश्वास हर दिन मेरा पथ आलोकित करते हैं। उनका दिया हुआ विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है, और उसी विश्वास को जनसेवा के माध्यम से सार्थक करना ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा धर्म और मेरे गुरु के प्रति सच्ची गुरु-दक्षिणा है।
पूज्य बाबूजी को गुरु पूर्णिमा पर शत-शत नमन।🙏

