आमतौर पर परिवारों में दादा-दादी बच्चों की परवरिश में सहयोग करते हैं, ताकि वे अपने बेटे और बहू का सहारा बन सकें। हालांकि, कुछ लोग इस मदद को अलग नजरिए से देखते हैं। ऐसा ही कुछ एक दादा-दादी के साथ हुआ, जो कनाडा में अपने बेटे-बहू के पास पहुंचे थे। यहां एक शख्स ने उन्हें ताना मारते हुए कहा, ‘कनाडा आ गए घर के जूठे बर्तन साफ करने और बच्चों को स्कूल छोड़ने-लाने का काम करने के लिए।’ इस पर उन्होंने ऐसा जवाब दिया, जिससे सुनकर हर किसी को एक बड़ी सबक मिलेगा। आइए जानते हैं कि उन्होंने ऐसा क्या कहा। विकास कौशल के इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किए गए एक वीडियो में उनके पिता संत कुमार शर्मा कनाडा में मिले एक अनुभव के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं कि एक व्यक्ति ने उनसे व्यंग्य करते हुए कहा, ‘हां जी, कनाडा आ गए… जूठे बर्तन साफ करने, बच्चों को पार्क घुमाने और स्कूल छोड़ने-लाने का काम करने।’ संत कुमार शर्मा बताते हैं कि उन्होंने उस शख्स से मुस्कुराते हुए कहा, ‘ये सारे काम तो आप भी यहां करते होंगे।’ इसके बाद उस व्यक्ति ने कहा, ‘नहीं जी, हमने तो बच्चों को साफ कह दिया है कि उन्हें पाल-पोसकर बड़ा कर दिया। अब उनके बच्चों को पालने का हमने ठेका नहीं लिया। उनकी परवरिश करना सिर्फ उनकी जिम्मेदारी है।’ यह वाकया बताने के बाद शर्मा आगे बताते हैं, ‘हम कनाडा किसी के सामाजिक नजरिए को बदलने या किसी बहस को जीतने नहीं आए हैं।’
इसके बाद संत कुमार शर्मा की पत्नी कहती हैं कि वे कनाडा इसलिए आए हैं ताकि अपने बच्चों को जितना हो सके, उतना आराम दे सकें। वह बताती हैं कि अगर वे रोज दो-तीन घंटे बच्चों को पार्क ले जाते हैं, तो यह उनके लिए किसी टॉनिक से कम नहीं होता। इस दौरान बच्चे घर के दूसरे काम आराम से निपटा लेते हैं। वह आगे कहती हैं, ‘ये काम तो हम भारत में भी करते थे, फिर कनाडा में इन्हें करने में शर्म कैसी?’

