उत्तर प्रदेश के बदायूं से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सिस्टम की सुरक्षा और आम आदमी की हालत दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 12 बीघा जमीन पर खेती करने वाले किसान भोला सिंह को अचानक 14 करोड़ रुपये से ज्यादा का टैक्स नोटिस मिल गया—वो भी ऐसे व्यापार के लिए, जिसके बारे में उन्हें खुद कुछ पता नहीं।
जांच में सामने आया कि उनके नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके दिल्ली में एक फर्जी फर्म चलाई जा रही थी। आयकर और GST का भारी-भरकम बकाया उसी फर्जी कारोबार का निकला, लेकिन नोटिस सीधे किसान के घर पहुंच गया। अब हालत ये है कि भोला सिंह अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, और कह रहे हैं कि पूरी जमीन बेच दें, तब भी इतनी रकम नहीं चुका सकते।
यह मामला सिर्फ एक किसान की परेशानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। अगर किसी का आधार-पैन इस तरह इस्तेमाल हो सकता है, तो सवाल हर आम नागरिक की सुरक्षा पर खड़ा होता है—आखिर जिम्मेदारी किसकी है?

