उनका नाम स्मृति सिंह है।
उनकी मुलाक़ात अंशुमन से इंजीनियरिंग कॉलेज के पहले ही दिन हुई थी। पहली नज़र का प्यार। एक महीने बाद ही अंशुमन का चयन AFMC में हो गया। उन्होंने 8 साल तक ‘लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप’ (दूर रहकर रिश्ता) निभाया।
10 फरवरी 2023 को दोनों ने शादी कर ली।
दो महीने बाद ही अंशुमन की पोस्टिंग सियाचिन में हो गई।
19 जुलाई 2023 की रात, उस गोला-बारूद डिपो में आग लग गई जहाँ अंशुमन तैनात थे। कैप्टन अंशुमन सिंह अपने साथी सैनिकों को बचाने के लिए आग में कूद पड़े। आग फैलते-फैलते मेडिकल रूम तक पहुँच गई। वे जीवन बचाने वाली दवाएँ लाने के लिए दोबारा अंदर गए।
लेकिन वे फिर कभी बाहर नहीं आए।
उस समय उनकी उम्र 26 साल थी।
5 जुलाई 2024 को, स्मृति राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने खड़ी थीं। उन्हें ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया—जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकाल का वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान उन्होंने अपने पति की ओर से ग्रहण किया।
उन्होंने अपनी आँखों में आए आँसुओं को बड़ी मुश्किल से रोका। और फिर उन्होंने ये शब्द कहे:
“मैं खुद को उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता मानती थी। लेकिन अब पता चला कि भारत के मुकाबले मैं बस ज़रा-सी पीछे थी।”
पूरा भारत यह सब देख रहा था और उसकी आँखें नम थीं।
इसके बाद, अंशुमन के माता-पिता ने मीडिया को इंटरव्यू दिए।
उन्होंने कहा कि स्मृति की शादी को अभी सिर्फ़ पाँच महीने ही हुए थे। कि उनकी कोई संतान भी नहीं थी। कि वह सारा पैसा लेकर चली गई है। और अगर उसे इस परिवार में ही रहना है, तो उसे उनके छोटे बेटे से शादी कर लेनी चाहिए।
रातों-रात, पूरा इंटरनेट स्मृति के खिलाफ़ हो गया।
उसे ‘गोल्ड डिगर’ (पैसे की लालची), ‘अवसरवादी’ और ‘असली पत्नी नहीं’ जैसे ताने दिए जाने लगे।
अंशुमन ने अपनी वसीयत में स्मृति को ही अपना ‘निकटतम संबंधी’ (Next of Kin) घोषित किया था। यह उनका कानूनी अधिकार था। उनकी अपनी मर्ज़ी थी। सेना ने भी इस बात की पुष्टि की थी। पेंशन स्मृति को ही मिली, क्योंकि अंशुमन ने उसी को चुना था।
स्मृति ने इस पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने कोई पलटवार नहीं किया।
शादी के महज़ दो महीने बाद ही उन्होंने अपने पति को खो दिया था। वे राष्ट्रपति भवन में बिल्कुल अकेली खड़ी थीं। उन्होंने अपने पति का मेडल स्वीकार किया। और जब भारत ने इस बात के लिए उन्हें ‘अपराधी’ कहना शुरू कर दिया, तब भी वे चुप ही रहीं।
उन्होंने भारत को अपना पति समर्पित कर दिया।
और बदले में, भारत ने उनके चरित्र पर ही कीचड़ उछाल दिया।
उनका नाम स्मृति सिंह है।
इस नाम को हमेशा याद रखिएगा।
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