चंदौसी, जनपद सम्भल | दिनांक : 25 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश सरकार की मिशन शक्ति पहल के अंतर्गत जनपद सम्भल की विशेष पॉक्सो न्यायालय द्वारा एक महत्वपूर्ण एवं संदेशात्मक निर्णय पारित किया गया है, जो बालिकाओं की गरिमा एवं सुरक्षा के प्रति न्यायपालिका की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) श्री अवधेश सिंह की अदालत ने विशेष सत्र परीक्षण संख्या 38/2022 (अपराध संख्या 70/2022, थाना गुन्नौर) में अभियुक्त पंकज पुत्र अशोक, निवासी नई बस्ती रजपुरा, थाना रजपुरा, जिला सम्भल को भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 506 एवं पॉक्सो अधिनियम की धारा 9/10 के अंतर्गत दोषसिद्ध पाते हुए धारा 10 पॉक्सो एक्ट में 05 वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹20,000 के अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय द्वारा पारित सजाएँ साथ-साथ चलेंगी।
👨⚖️ न्यायालय की स्पष्ट टिप्पणी
निर्णय सुनाते हुए माननीय न्यायालय ने कहा कि समाज में बालिकाओं की मर्यादा एवं सम्मान की रक्षा सर्वोपरि है तथा ऐसे अपराध किसी भी प्रकार की सहानुभूति के पात्र नहीं हो सकते। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बाल संरक्षण संबंधी कानूनों का उद्देश्य केवल दंडादेश देना नहीं, बल्कि समाज में निवारक प्रभाव उत्पन्न करना भी है।
यह निर्णय साक्ष्य-आधारित न्यायिक प्रक्रिया का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ गवाहों के सुसंगत बयान, चिकित्सीय प्रमाण एवं अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के समुचित विश्लेषण के आधार पर दोष सिद्ध किया गया।
⚔️ अभियोजन की सशक्त एवं संगठित भूमिका
प्रकरण में राज्य की ओर से प्रभावी एवं तथ्यनिष्ठ पैरवी विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट) श्री नरेन्द्र कुमार यादव द्वारा की गई।
श्री यादव ने न्यायालय के समक्ष साक्ष्यों का तार्किक एवं विधिसम्मत विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए अभियुक्त के अपराध को संदेह से परे सिद्ध किया। उनकी संवेदनशील, दृढ़ एवं कानूनसम्मत दलीलों के परिणामस्वरूप पीड़िता को न्याय प्राप्त हुआ।
इस प्रकरण में पैरोकार रविन्द्र कुमार तथा न्यायालय के कोर्ट मुहर्रिर विनोद कुमार राठौर,राम कुमार का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा, जिन्होंने अभियोजन कार्यवाही को सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🛡️ शासन एवं प्रशासन की प्रतिबद्धता
यह निर्णय माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की महिला एवं बाल सुरक्षा के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
जनपद सम्भल के जिलाधिकारी श्री राजेन्द्र पेंसिया, पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण कुमार तथा अभियोजन विभाग की समन्वित कार्यप्रणाली ने सुनिश्चित किया कि विवेचना से लेकर न्यायालयीन निर्णय तक की समस्त प्रक्रिया गंभीरता, प्राथमिकता एवं संवेदनशीलता के साथ संपन्न हो।
🌸 समाज के नाम सशक्त संदेश
यह निर्णय केवल एक अभियुक्त को दंडित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक सामाजिक संदेश भी देता है—
बालिकाओं की अस्मिता पर प्रहार करने वालों को कठोर दंड अवश्य मिलेगा।
पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत अपराधों में न्यायालय त्वरित एवं परिणामकारी न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध है।
शासन, प्रशासन और समाज—तीनों की संयुक्त जिम्मेदारी है कि बेटियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
✍️ न्याय का अडिग संकल्प
यह फैसला पुनः स्थापित करता है कि—
“जहाँ भी बालिका के सम्मान पर आंच आएगी, वहाँ कानून दृढ़ता और संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप करेगा।”
⚖️ न्याय की दृढ़ प्रतिध्वनि : बेटियों की अस्मिता पर आघात करने वालों को कठोर दंड
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