संभल जिले की तहसील चंदौसी से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बेरनी रतनपुर अपने प्राचीन “शिव मंदिर” के लिए क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है । पुरातत्व विभाग के अनुसार यह शिव मंदिर पांचवी सदी का हो सकता है जो तत्कालीन राजा बैन के समय का है और उन्हीं के नाम पर गांव बेरनी का नाम पड़ा ।
सन 2009 में काफी बरसात होने पर मंदिर का भवन ढह गया था परंतु आश्चर्य जनक रूप से मंदिर में स्थित प्राचीन शिवलिंग का कोई नुकसान नहीं हुआ , तभी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया तो वहां सवा फीट लंबी तथा एक फीट चौड़ी 4 किलो की ईट प्राप्त हुई जिसका पुरातत्व विभाग द्वारा अध्ययन करने के पश्चात यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह ईट पांचवी सदी की है । इससे पूर्व सन 1805 में चंदौसी की रानी रामकली द्वारा भी बेरनी के प्राचीन शिव मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया था । ऐसी किरदांती है कि 150 फीट की खुदाई के बाद भी प्राचीन शिवलिंग की कोई थाह प्राप्त नहीं हुई थी और कोई भी व्यक्ति आज तक इस प्राचीन शिवलिंग को अपनी बाहों में नहीं भर सका है ।
सन 2009 में ही कुछ किसानों द्वारा यहां स्थित टीलों की खुदाई करने पर “चतुर्भुज भगवान” की खंडित मूर्ति भी मिली थी , जिसका अध्ययन कर पुरातत्व विभाग द्वारा 800 से 1000 वर्ष पुराना बताया गया , विभाग के अनुसार इस प्रकार की प्रतिमाएं दक्षिण भारत में मिलती हैं । इस घटना के बाद सन 2009 में विभाग ने यहां टीलों की खुदाई पर रोक लगा दी ।
श्रावण मास में यहां इस प्राचीन मंदिर क्षेत्र में काफी बड़ा शिवरात्रि मेला लगता है जिसमें हजारों कावड़िया जल अभिषेक कर “हर हर महादेव” का उदघोष करते हुए जाते है । मुरादाबाद , बदायूं , संभल , अलीगढ़ व बुलंदशहर से भी काफी बड़ी तादाद में श्रद्धालु इस प्राचीन शिवलिंग के दर्शन के लिए अक्सर आते रहते हैं , इसके अतिरिक्त सन 1920 में बेरनी को नोटिफाइड एरिया भी घोषित किया गया था ।
बिलारी के विधायक मोहम्मद फहीम इरफान द्वारा विधानसभा में पर्यटन मंत्री के समक्ष बेरनी के प्राचीन शिव मंदिर को पर्यटन स्थल घोषित करने की भी मांग की है जो की एक सराहनीय कदम है । हजारों वर्षों की विरासत अपने अंदर समेटे बेरनी के प्राचीन शिव मंदिर पर लोगों की आस्था देखते ही बनती है । हजारों , लाखों लोग यहां अपनी मन्नत मांग कर जाते हैं और उसके पूरी होने पर “हर हर महादेव” का उद्घोष करते हुए जाते हैं ।
मेरा इस लेख के माध्यम से पुरातत्व विभाग से अनुरोध है की बेरनी क्षेत्र के टीलों की खुदाई की जाए तो यहां बहुत सी महत्वपूर्ण वस्तुएं मिल सकती है जो कि राष्ट्र की एक धरोहर होगी , साथ ही इस क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता ।
“पांचवी सदी का है बेरनी का प्राचीन शिव मंदिर”
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