जालौन के उरई नगर पालिका परिषद में बुधवार को जांच को लेकर विवाद हो गया। आईएएस अफसर रिंकू सिंह राही दोपहर 2 बजे नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। अनियमितताओं से जुड़ी फाइलें देखनी शुरू कर दीं। इस पर वहां मौजूद अधिशासी अधिकारी ने आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।
आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने ईओ से कहा, आदेश दिखाइए। आखिर किस आदेश में लिखा है कि मुझे अभिलेख नहीं दिखाए जाएंगे। आप वह आदेश दिखा दीजिए, मैं तुरंत चला जाऊंगा।अधिशासी अधिकारी का आरोप है कि रिंकू सिंह राही अपने कुछ निजी लोगों को लेकर पहुंचे थे। वे फाइलें देखने के दौरान वीडियो बना रहे थे।
दरअसल, नगर पालिका परिषद उरई में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जांच चल रही थी। इस जांच टीम में रिंकू सिंह भी थे, जो उस समय जालौन के एसडीएम थे। लेकिन उरई ट्रांसफर होने के बाद उनकी भूमिका खत्म हो गई थी।
उरई नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार को लेकर सभासदों ने डीएम राजेश कुमार पांडेय को ज्ञापन सौंपा था। इसे लेकर डीएम के निर्देश पर 18 जून, 2026 को अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति में तत्कालीन एसडीएम रिंकू सिंह राही को पदेन और लोक निर्माण विभाग (प्रांतीय) के अधिशासी अभियंता अमित सक्सेना को सदस्य बनाया गया था।
रिंकू सिंह राही का ट्रांसफर के बाद अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद ने 17 जुलाई, 2026 को आदेश जारी कर जालौन के वर्तमान एसडीएम राकेश कुमार सोनी को समिति का पदेन सदस्य नामित कर दिया। जिससे रिंकू सिंह राही की भूमिका समाप्त हो गई।
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील का आरोप है कि रिंकू सिंह राही जांच से जुड़ी फाइलें उपलब्ध कराने की मांग करने लगे। इस पर उन्होंने प्रशासनिक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि आप जांच समिति के सदस्य नहीं हैं। इसलिए आपको फाइल नहीं दिखा सकते।
अधिशासी अधिकारी ने कहा कि कार्यालय बंद होने के समय सभी फाइलें उपलब्ध कराना संभव नहीं है। अगर भीड़भाड़ के बीच कोई सरकारी दस्तावेज गुम हो गया तो उसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।
वहीं, रिंकू सिंह राही ने राम अचल कुरील पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें अपने पक्ष में करने और अनुचित तरीके से प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा। इस दौरान मौके पर मौजूद लोग पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाने में लगे रहे।

